Monday,05 October 2020

एक ओर जहां देश कोरोना की समस्या से जूझ रहा है वही इस महामारी के दौर में कुछ लोग मुनाफाखोरी में लगे हुए हैं, मामला नकली PPE किट से जुड़ा हुआ है कुछ लोगों द्वारा घटिया कच्चे माल और तिरपाल से कोरोना योद्धाओं के लिए नकली पीपीई किट तैयार की जा रही है। यह PPE किट हाईजेनिक मापदंडों पर भी खरी नहीं उतर रही हैं, और ये गोरखधंधा लगातार खूब फलफूल रहा है और दलालों का जाल भी निरंतर फैलता जा रहा है।


हाईजेनिक मापदंडों को ताक पर रखकर अवैध रूप से घरेलू मशीनों से गंदगी की जगह में महिलाओं व बच्चों द्वारा तैयार कराए जा रहे नकली पीपीई किट मामले में एनजीओ स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है।केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कोरोना वायरस के बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले मास्क और पीपीई किट सहित अन्य मेडिकल उपकरणों के संबंध में स्पष्ट हिदायतें जारी की हुई हैं, लेकिन इन सबकी अनदेखी कर तिरपाल और कैरी बैग बनाने वाले नॉन वुवन कपड़े से नकली पीपीई किट तैयार हो रही हैं।

भारी मुनाफा है कारण

एक नकली पीपीई किट को तैयार कराने में मात्र 40 रुपये का खर्च आ रहा है, जबकि इसी नकली पीपीई किट को मार्केट में 250 से 700 रुपये तक बेचकर मुनाफा कूटने के साथ कोरोना योद्धाओं की जान भी जोखिम में डाली जा रही है। इस पर न को कोई आईएसआई मार्का लगा है न ही निर्माता कंपनी का कोई टेग। किसी भी कंपनी को मास्क व पीपीई किट बनाने के लिए लाइसेंस जरूरी है और मार्केट में केवल आईएसआई मार्का व ब्रांडिंग कंपनी भी दर्शाना जरूरी है। इस भारी मुनाफे के कारण यह नकली PPE किट बनाने वाले हाईजेनिक मापदंडों की अनदेखी कर कोविड-19 के योद्धाओं की जान भी जोखिम में डाल रहे हैं।

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