Friday, 12 Jun, 10.58 pm

नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राज्यसभा में आकस्मिक रिक्तियों के उपचुनाव कराने के लिए अलग-अलग अधिसूचना जारी करने के चुनाव आयोग के अधिकार पर वह एक आधिकारिक फैसला सुनाना चाहता है। शीर्ष अदालत कांग्रेस नेता गौरव पांड्या समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। गौरव पांड्या ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के चुनाव को चुनौती दी है।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने पिछले साल गुजरात से दो राज्यसभा सीटों पर कराए गए उपचुनावों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई चार हफ्तों के लिए स्थगित कर दी। संक्षिप्त सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा, इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का कोई आधिकारिक फैसला नहीं है कि एक से ज्यादा रिक्तियों पर चुनाव अलग-अलग कराए जाने चाहिए या एक साथ। 

इसलिए हमें इस मसले पर एक आधिकारिक फैसला सुनाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि राज्यसभा में रिक्तियों को भरने के लिए नियमित और आकस्मिक चुनाव कराने के चुनाव आयोग के अधिकारों से संबंधित याचिकाओं में कानून के कई सवाल हैं। शीर्ष अदालत में जयशंकर और गुजरात से राज्यसभा चुनाव में विजयी अन्य भाजपा उम्मीदवार जुगलजी ठाकोर की ओर से शीर्ष अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और सतपाल जैन पेश हुए। जयशंकर ने पहले ही अधिवक्ता स्वरूपमा चतुर्वेदी के जरिये सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की हुई है।

इसमें मांग की गई है कि गुजरात हाई कोर्ट के चार फरवरी के आदेश के खिलाफ दायर किसी भी याचिका पर फैसले से पहले उनका भी पक्ष सुना जाए। हाई कोर्ट ने जयशंकर के चुनाव को चुनौती देने वाली गौरव पांड्या की याचिका खारिज कर दी थी। इसके अलावा हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता चंद्रिकाबेन चुडास्मा और परेशकुमार धनानी की याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं जिन्होंने जुगलजी ठाकोर के चुनाव को चुनौती दी थी।

चंद्रिकाबेन और परेशकुमार ने भी हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। 

मालूम हो कि पिछले साल पांच जुलाई को हुए उपचुनाव में जयशंकर और ठाकोर दोनो विजयी हुए थे। ये सीटें अमित शाह और स्मृति ईरानी के इस्तीफ़ों से रिक्त हुई थी।

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