जब दुनिया भर में कोरोना संकट पांव पसार चुका था, मोदी सरकार ने तमाम चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया। ऐसे वक्त में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उचित कदम उठाने शुरू कर दिये। संभावित स्थिति को देखते हुए ज़रूरतमंदों के लिये दो महीने का राशन मुफ्त देने की व्यवस्था की। 19 मार्च को जब कोरोना का पहला केस मिला तब तक छत्तीसगढ़ में संक्रमण रोकने के लिये ज़रूरी निर्णय लिये जा चुके थे। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझावों को धता बताकर भाजपा नमस्ते ट्रंप, सरकार गिराने के कुत्सित खेल जैसे प्रपंचों में लगी रही। जब कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने आने वाले खतरे से आगाह किया तो उन्हें ट्रोल किया गया। डॉ. हर्षवर्धन, संबित पात्रा जैसे डॉक्टर ने भी ट्रोल जैसी हरकत की। जब मध्यप्रदेश में सरकार गिराकर, लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर मोदी जी निवृत्त हुए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घंटा बजवाने और थाली पिटवाने के बाद मोदी जी 24 मार्च को 8 बजे टीवी पर अवतरित हुए। और 4 घंटे के नोटिस पर संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा कर दी। बिना ये सोचे कि प्रवासी मजदूर जो अपने घर से दूर हैं, रोज़ कमाते-खाते हैं उनका क्या होगा? जिन लोगों के लिये वे काम करते थे उन्होंने ठेंगा दिखा दिया। मुश्किल समय में हर व्यक्ति अपने घर पर, अपने परिवार के साथ रहना चाहता है। अगर श्रमिक ऐसा सोचते हैं तो क्या गलत है?

बिना तैयारी लॉक डाउन और आरोप राज्य सरकारों पर
जब लॉक डाउन लगातार बढ़ता गया तब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रमिकों को वापस लाने की पहल की। भविष्य की अनिश्चितताओं और देश में लगातार बढ़ते कोविड-19 के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार से बातचीत की पहल की। विभिन्न माध्यमों से प्रवासी श्रमिकों की जानकारी जुटाई गई और केंद्र सरकार से ट्रेन की मांग की। ऐसे समय में जब श्रमिकों के पास न काम है न पैसा असंवेदनशील केंद्र सरकार ने उनसे ट्रेन की टिकट के पैसे लिये। जिसे बाद में कांग्रेस अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी जी के निर्देशानुसार कांग्रेस ने वहन किया। छत्तीसगढ़ सरकार ने श्रमिकों की संख्या के आधार पर 30 ट्रेनों की मांग की थी। जिसके आधार पर रेलवे को एक करोड़ सत्तर लाख रूपये दिए। केंद्र सरकार ने अब तक सिर्फ 14 ट्रेनें छत्तीसगढ़ को दी है। रेल मंत्री पीयुष गोयल ने सीधे-सीधे उन राज्य सरकारों पर आरोप मढ़ दिया है जहाँ भाजपा नहीं है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीधे रेल मंत्री के आरोपों का जवाब देते हुए उन्हें गलत बताया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले श्रमिकों के लिये राहत व क्वारंटाइन की पूरी व्यवस्था की हुई है। प्रवासी मज़दूरों की मानसिक व शारीरिक यंत्रणा के लिये केंद्र सरकार द्वारा बिना तैयारी के थोपा हुआ लॉकडाउन है। लॉकडाउन एक ऐसी व्यवस्था है कि जिसके माध्यम से संक्रमण के प्रसार को रोक कर संक्रमित व्यक्तियों का पता लगाया जाता। केंद्र सरकार लॉकडाउन को उपचार मानकर चल रही है, जिसकी वजह से इसे बार-बार बढ़ाना पड़ रहा है। कोविड-19 पॉज़िटिव मरीजों की संख्या कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है। छत्तीसगढ़, केरल जैसे कुछ राज्यों ने कोरोना संक्रमण को बड़े पैमाने पर फैलने से रोकने में कामयाबी हासिल की है। इसमें केंद्र की मोदी सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह राज्य सरकारों की जागरूकता के कारण संभव हुआ। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग की व्यवस्था राज्य की सरकारों ने स्वयं संज्ञान लेते हुए की है।

केंद्र सरकार के पास कोरोना से लड़ने के लिये कोई योजना नहीं है, न ही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उपाय। 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज के नाम पर झुनझुना पकड़ा दिया गया है। आज भी आर्थिक पैकेज के नाम पर केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार की बात को अनसुनी कर रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बार-बार राहत पैकेज की मांग की जा रही है। लेकिन बात को घुमाकर भाजपा द्वारा जनता की आँखों में धूल झोंकने के प्रयास किये जा रहे हैं।

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