4 जून 2020

नई दिल्ली, एएनआइ। सीमा पर तनाव के बीच भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के जमावड़े पर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन किस तरह इस क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में फौजियों को ले आया। सूत्रों के अनुसार इस विस्तृत रिपोर्ट में दौलत बेग ओल्डी और पैंगांग त्सो समेत पूर्वी लद्दाख के सभी महत्वपूर्ण जगहों पर चीनी सेना के जमावड़े का विवरण दिया गया है।

मई के पहले सप्ताह में चीन ने पां हजार सैनिक तैनात किए रिपोर्ट में सरकार को उन सभी बिंदुओं से जानकारी दी गई है कि कैसे चीन इतनी तेजी से इतनी बड़ी तादाद में अपनी सैनिकों को इन मोर्चो पर ले आया। मई के पहले सप्ताह में चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने पांच हजार सैनिक तैनात कर दिए थे। चीन ने अचानक इतनी बड़ी तादाद में सैनिक तैनात करके भारतीय पक्ष को चौंका दिया था।

इसके बाद भारत ने भी ऊंचाई पर लड़ाई में प्रशिक्षित अपनी रिजर्व टुकड़ियों को फौरन यहां तैनात किया। ये टुकड़ि‍यां लद्दाख में मौजूद सैनिकों के अतिरिक्त हैं। मई के पहले सप्ताह से वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करके बैठे चीनी सैनिकों की स्थिति में धरातल पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। कई जगहों पर चीनी और भारतीय सैनिक आमने-सामने हैं।

भारतीय सेना के समय पर सक्रिय होने से नहीं पूरा हुआ चीन का मंसूबा

ऐसा माना जा रहा है कि चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में और अंदर कब्जा जमाना चाहते थे लेकिन भारतीय सेना के समय पर सक्रिय होने से चीन का यह मंसूबा पूरा नहीं हो पाया। शनिवार को होने जा रही दोनों देशों के बीच लेफ्टीनेंट जनरल स्तर की होने जा रही बैठक से भारत और चीन इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं। इस बीच भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सीमा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा।

रोड़े अटकाते हैं चीनी

चीनी सेना लद्दाख में भारतीय सेना को मजबूत होते देख वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विकास के प्रोजेक्टों में रोड़े अटका रही है। ऐसे में उसने गलवन घाटी, पैंगोंग त्सो समेत तीन जगहों पर आक्रामक तेवर दिखाते हुए घुसपैठ की थी। इसके बाद भारतीय सेना ने भी चीन को कड़े तेवर दिखकर बाज आने का स्पष्ट संकेत दिया है।

भारत अपनी क्षेत्रीय अस्मिता के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ

भारत शांति में विश्वास करता है लेकिन जब उसकी क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा पर संकट आएगा तो वह पूरी दृढ़ता और संकल्प से इसका जवाब देगा। भारत का यह रुख उसके द्वारा चीन से किए गए चार समझौतों में भी झलकता है। भारत ने सबसे पहले 1993 और फिर 1996 में समझौता किया है। इसके बाद 2005 में विश्वास बहाली उपाय समझौता (सीबीएम) किया गया। इसके बाद 2013 में सीमा समझौता किया गया। इन समझौतों के बाद से सीमा विवाद सुलझाने के लिए एक तंत्र विकसित हुआ है। यह तंत्र अभी भी काफी कारगर है।

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