Friday, 05 Jun,2020

नई दिल्‍ली। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद की स्‍थायी सीट हासिल करने पर भारत की काफी समय से निगाह लगी है। अमेरिका राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने हाल ही में भारत का स्‍थायी सीट की दावेदारी को लेकर खुलकर समर्थन किया था। इसके अलावा एक दिन पहले ही वुर्चअल समिट के दौरान आस्‍ट्रेलियाई पीएम स्‍कॉट मॉरिसन ने भी इस सीट के लिए भारत के दावे का समर्थन किया था। यूएनएससी में भारत की मौजूदगी का सवाल यहां पर इसलिए भी उठ रहा है क्‍योंकि 17 जून को सुरक्षा परिषद की अस्‍थायी सीट के लिए चुनाव होना है। इसमें भारत का जीत तय मानी जा रही है। आपको बता दें कि सुरक्षा परिषद में अस्‍थायी सदस्‍यता एक वर्ष के लिए दी जाती है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ परिषद में स्‍थायी सीट को लेकर आशंका के बादल पूरी तरह से छटे नहीं है। अमेरिकी राजनीति को बेहद करीब से देखने वाली और अमेरिका में भारत की पूर्व राजदूत मीरा शंकर की इस बारे में राय कुछ अलग है।

उनका कहना है कि जिस तरह का बयान राष्‍ट्रपति ट्रंप ने इस बार दिया है उस तरह का बयान पहले भी अमेरिका की तरफ से दिया जाता रहा है। लेकिन इसकी सच्‍चाई हम सभी के सामने है। उनके मुताबिक पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने भी बयानों में सुरक्षा परिषद में भारतीय दावेदारी का समर्थन किया था लेकिन उससे हुआ कुछ नहीं। उनकी निगाह में अमेरिका कहीं न कहीं इन बयानों के पीछे ये भी चाहता है कि इस परिषद के सदस्‍यों की संख्‍या न बढ़ाई जाए। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की राजनीति शुरुआत से ही इस तरह की रही है कि उनके दिए इस तरह के बयान हकीकत नहीं बन पाते हैं। इसलिए इस बार अमेरिका की तरफ से आए बयान को लेकर ज्‍यादा खुश होने की जरूरत नहीं है।

पूर्व राजदूत का ये भी कहना है कि सुरक्षा परिषद में भारत की स्‍थायी सदस्‍यता के लिए सबसे बड़ा रोड़ा चीन है। चीन के पास में वीटो पावर है जिसका उपयोग वो हर बार करता आया है। इस बार भी भारत के मुद्दे पर वो इसका इस्‍तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। यही वजह है कि मीरा मानती है कि यूएनएससी में स्‍थायी सीट मिलना भारत के लिए अभी सपने जैसा ही है। उनका कहना है कि इस परिषद में चीन एकमात्र ऐसा देश है जो हर बार रोड़ा अटकाता आया है। इसलिए बिना चीन को साधे भारत का ये सपना सच होना काफी मुश्किल लगता है।

उनके मुताबिक संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में चीन को छोड़कर दूसरे देश भी भारत की स्‍थायी सदस्‍यता का समर्थन कई मंचों पर करते आए हैं, लेकिन कहीं न कहीं वे भी नहीं चाहते हैं कि इसके सदस्‍यों की संख्‍या बढ़े। गौरतलब है कि भारत एक साल पहले ही एशिया प्रशांत समूह के 55 देशों द्वारा सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए समर्थन हासिल कर चुका है। आगामी चुनाव तो महज इसकी तकनीकी प्रक्रिया है। भारत सात बार सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य रह चुका है।

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