पाकिस्तान की सरजमीं से संचालित आतंकी गुटों के लिए कोरोना वायरस महामारी अप्रत्याशित तोहफा साबित हो रही है। इन गुटों के जो आतंकी जेलों में बंद थे, उन्हें कोरोना महामारी के फैलने के नाम पर रिहा कर दिया गया। पाकिस्तान ने वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की काली सूची में डाले जाने से बचने के लिए लश्कर-ए-तैइबा प्रमुख हाफिज सईद समेत कई आतंकियों को जेल में बंद किया गया था लेकिन अब ये आराम से अपने घरों में रह रहे हैं और साजिश रच रहे हैं।

पिछले महीने पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट कर जानकारी दी थी कि लाहौर जेल में बंद करीब 50 कैदी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इस स्थिति ने पाकिस्तान को आतंकियों को रिहा करने का एक अच्छा मौका मुहैया करा दिया।

इस वक्त सारी दुनिया का ध्यान लाखों लोगों की जान ले चुकी जानलेवा बीमारी से निपटने पर है। ऐसे में पाकिस्तान की इस हरकत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई प्रतिक्रिया आने की उम्मीद नहीं है। एफएटीएफ पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बनाए रखने पर अगले महीने समीक्षा करेगा। वॉल स्ट्रीट जर्नल की 20 अप्रैल की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अपनी आतंकवादी निगरानी सूची से करीब 1800 आतंकियों के नामों को हटा दिया।

वहीं दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर में हाल के दिनों में बढ़ती आतंकी घटनाओं से साबित होता है कि पाकिस्तान का ध्यान महामारी से निपटने पर नहीं बल्कि इस संकट का इस्तेमाल भारत में आतंकियों की घुसपैठ और संघर्ष विराम उल्लंघन में कर रहा है। 18 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में तीन सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे और तीन अन्य घायल हो गए थे। एक हफ्ते के अंदर बल पर यह तीसरा हमला था। राज्य के डीजीपी ने भी एक बयान में कहा था कि अभी तक हम पाकिस्तान द्वारा आतंकियों की घुसपैठ के बारे में ही सुनते आ रहे हैं लेकिन अब वह राज्य के लोगों को संक्रमित करने के लिए कोरोना वायरस पॉजिटिव लोगों को भेज रहा है

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