6 June,2020


रायपुर,। देशभर में आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों की सूची में आने वाला राज्य छत्तीसगढ़ कोरोना की जंग में भी पिछड़ता जा रहा है। खाली हो चुके सरकारी खजाने को भरने के लिए भूपेश सरकार अब सरकारी कर्मचारियों पर एक बार फिर से बिजली गिराने की तैयारी में जुटी हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य के सरकारी कर्मचारियों के 30 फीसदी वेतन कोरोना संकट की वजह से काटे जा सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के दो दिन की सैलरी काटने की बात चल रही है। हालांकि इसका विरोध भी शुरू हो चुका है। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकारी कर्मचारियों के वेतन वृद्धि, नई नौकरियां, प्रमोशन, टीए व डीए जैसे कार्यों पर अगले एक साल के लिए सख्त रोक लगा चुकी है।

कोरोना के खिलाफ जंग में आर्थिक मोर्चे पर विफल भूपेश सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब भाजपा ने हमला बोला है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि कुप्रबंधन के कारण छत्तीसगढ़ की सरकार का खजाना खाली हो गया है और ऐसे समय में सरकार मितव्ययिता के नाम पर शासकीय कर्मचारियों को निशाना बना रही है। शनिवार को एक बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि वादे के साथ सत्ता में आई भूपेश सरकार कोरोना के खिलाफ हर मोर्चे पर विफल रही है।

और अब प्रदेश के साढे़ चार लाख कर्मचारियों के 30 फीसदी वेतन काटने की तैयारी कर रही है। भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा कि आज राज्य के छोटे-बड़े सभी कर्मचारी कोरोना महामारी में जान की परवाह किये बिना ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को अलग से वेतन देने के बजाय भूपेश सरकार उनके वेतन काट रही है। उन्होंने मांग की है कि छत्तीसगढ़ सरकार कर्मचारियों का 50 50 लाख का बीमा तुरंत कराएं और अल्प वेतन कर्मचारियों को जोखिम भत्ता प्रदान करें।

उल्लेखनीय है कि आर्थिक मोर्चे में विफलता की वजह से राज्य के उद्योग धंधे अभी तक सुचारू रूप से चालू नहीं हो पाये हैं। राज्य के औद्योगिक समूहों ने आर्थिक पैकेज की मांग की थी। हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक कोई घोषणा नहीं की है। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here