चंद्रकांत पारगीर, बैकुंठपुर। सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ से बीपी हाई होने के बाद बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल बैकुंठपुर पहुंचे मरीज की मौत हो गई, मृतक के परिजन रात भर डाक्टरों के दरवाजे खटखटाते रहे, सुबह की मौत की खबर के बाद बैकुंठपुर विधायक स्वयं जिला अस्पताल पहुंची। मृतको के परिजनों से मुलाकात के बाद बाद सीएस सहित सीएमएचओं को मौके पर बुलाया और इलाज में लापरवाही पर सीएमएचओ को कार्यवाही के निर्देश दिए।

लापरवाहों पर कार्रवाई के निर्देश-अंबिका सिंहदेव
इस संबंध में बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव का कहना है कि गंभीर हालत में मरीज लाया गया था, नेत्र विशेषज्ञ ड्यूटी पर थे, ये केस उनके बस का नहीं था, जिन चिकित्सकों को बुलाया गया वो मौके पर नहीं पहुंचे, डॉ सेंगर के अलावा और किसी डाक्टर ने मरीज को नही देखा। मैने लापरवाही पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। चिकित्सक है तो उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए।

लापरवाही, कार्रवाई होगी- सीएमएचओ
वहीं सीएमएचओ डॉ रामेश्वर शर्मा का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा फोन नहीं उठाना, रिस्पांड नहीं करना है, ये लापरवाही है, सीएस की रिपोर्ट के बाद लापरवाही करने वालो पर कार्यवाही की जाएगी।

डाक्टर ने कहा मैं खुद बीमार
वहीं सीएस डॉ एसके गुप्ता का कहना है कि मै स्वयं बीमार हूं, मेरे कमर में दर्द रहता है। जिस चिकित्सक को बुलाया गया, उन पर कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके है। हमने उनकी दिन में ड्यूटी नहीं लगाई है। मरीज का एंजियोप्लास्टिक हो चुका था, उनका बीपी 220, 120 था बैकुंठपुर आने पर 180, 110 था। दवाईयां भी दी गई। इतने बीपी में ब्र्रंेन हैमेंज होने की पूरी संभावना है।

मनेन्द्रगढ में बढ गया था बीपी
मनेन्द्रगढ के वार्ड नं 14 निवासी पवन कुंभकार की तबियत 24 अप्रैल को अचानक बिगड गई जब वो अपने दोस्त के घर गए थे, उनके भाई संतोष कुमार का कहना है कि उन्हे सबसे पहले मनेन्द्रगढ स्थित खान नर्सिग होम ले जाया गया जहां पेसेंट को लेने से इंकार कर दिया, जिसके बाद उन्हे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया, जहां उनका बीपी 220, 120 था, कुछ देर बाद चिकित्सकों ने बैकुंठपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया, यहां लगभग 10 बजे वे पहुंचें, ड्यूटी पर तैनात डॉ संगर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एमडी डॉ एके सिंह को बुलाया, परन्तु वो नहीं आ सके।

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चेक करने नहीं आए डाक्टर
दूसरी ओर सिविल सर्जन एसके गुप्ता के घर परिजन पहुंच गए, जिस पर उन्होने दवाएं लिखकर डॉ सेंगर से बात करने को कहा, दवाएं देने के बाद सुबह 4 बजे के आसपास मरीज की मौत हो गयी। उनका आरोप है कि डॉ गुप्ता ने उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया और ना ही देखते आए।

बिना देखे कैसे रेफर
शनिवार की सुबह जिला अस्पताल पहुंची विधायक अंबिका सिंहदेव ने सीएस, सीएमएचओ और डॉ एके सिंह को मौके पर बुलाया, सीएस सीएमएचओं मौके पर पहुंचे, उन्हें सीएस डॉ एसके गुप्ता ने अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी, जिस पर उन्होने उनकी तबियत को लेकर उन्हें पूरी स्थिति शासन को लिखकर देने को कहा, वहीं उन्होने बिना देखे रेफर करने पर भी सवाल उठाए, उन्होने सीएमएचओं को इस मामले में कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए ताकि रात में चिकित्सक मरीज को देखने में किसी प्रकार की कोताही ना बरते।

डॉ गुप्ता के नाम से करते हैं रेफर
दरअसल, जिला अस्पताल बैकुंठपुर में खडगवां, सोनहत, भरतपुर और सबसे ज्यादा मनेन्द्रगढ से रेफर केस आते है। सीएस डॉ एसके गुप्ता का कहना है कि वहां से सीधे डॉ गुप्ता का नाम लेकर चिकित्सक रेफर कर देते है, जबकि जिला अस्पताल कह कर भेजा जाना चाहिए, ऐसे में मरीज के मुंह पर मेरा ही नाम रहता है दूसरे चिकित्सकों का मेरे को सहयोग नहीं मिल पाता है।

कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की है कमी
वर्ष 2005 में बने जिला अस्पताल में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। वर्ष 2006 के बाद निश्चेतना विशेषज्ञ नहीं होने से अचानक आने वाले गंभीर मरीजों के आपरेशन नहीं हो पाते है। वहीं जरूरी होने पर बाहर से निश्चेतना विशेषज्ञ को बुलाना पडता है, यहां न्यूरोलॉजिस्ट, नेफरोलॉजिस्ट, हार्ट की बीमारी के विशेषज्ञ, स्कीन विशेषज्ञ, गैस्ट्रोलॉजिस्ट सहित कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञ की जिला अस्पताल बनने के समय से कमी बनी हुई है।

आप सहज अंदाजा लगा सकते है कि जिला अस्पताल में कैसे मरीजों को इलाज हो पाता होगा। सरकार बदली, कई चिकित्सकों को लाया गया, परन्तु विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव पर अभी तक कोई ठोस काम नहीं हो पाया है।

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