माहभर से घर में घिरे कुंभकारों को लॉकडाउन से लाखों की चपत

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। मिट्टी को आकार देकर घड़े और कलश के अलावा त्यौहारी उत्साह को बढ़ाने वाले कुंभकारों का जीवन लॉकडाउन में फंसा हुआ है। आर्थिक संकट और गरीबी के साये में घिरे कुंभकारों की अब तक किसी ने सुध नहीं ली। पुश्तैनी कारोबार कर गुजर-बसर करने वाले कुंभकारों को लॉकडाउन हटने का बेसब्री से इंतजार है।

लॉकडाउन को विभीषिका मान रहे कुंभकारों को कारोबार ठप्प होने से लाखों रुपए की चपत लग गई है। ऐन गर्मी के मौसम में गरीब तबके के बीच देशी फ्रिज माने जाने वाले घड़े की बिक्री जहां रूकी हुई है। वहीं नवरात्र पर्व के लिए तैयार किए गए कलश भी घरों में ही डंप हैं। इस परीक्षा की घड़ी में कुंभकारों के कुनबों में आर्थिक संकट साफ नजर आ रहा है।

मिट्टी के जरिए दीये, कलश, घड़ा और अन्य सामग्रियां बनाने वाले कुंभकारों को भविष्य की चिंता हो रही है। शहर के मोहारा वार्ड में बसे 4 परिवार के घरों में घड़े और कलश लॉकडाउन के कारण डंप रखे गए हैं। खासतौर पर घड़े का व्यापार नहीं होने से पूरे कुंभकार सहमे हुए हैं।

कुंभकारों ने अपनी मौजूदा स्थिति को लेकर चर्चा की। रोहणीबाई का कहना है कि लॉकडाउन के कारण अब तक 50 हजार रुपए का नुकसान हुआ है। लकड़ी और मिट्टी की किल्लत भी उनके पुश्तैनी कारोबार को नुकसान पहुंचा रही है। रोहणीबाई ने बताया कि जीवनयापन करने का संकट उनके सिर पर मंडरा रहा है। अब तक किसी ने भी उनकी सुध नहीं ली है।

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इसी तरह गोलूराम प्रजापति भी लॉकडाउन में हुए बड़े घाटे से परेशान हैं। नवरात्र पर्व में ज्योति कलश बनाने के बावजूद बिक्री नहीं हो पाई। लॉकडाउन के कारण मंदिरों में ज्योति कलश की स्थापना नहीं हो पाई। जिसके कारण यह नुकसान हुआ है। वहीं गर्मी के मौसम के लिहाज से तैयार किए गए मटकों का सौदा नहीं हो पाया। तैयार किए गए माल अब तक घरों में ही है।

एक और कुंभकार पवन का कहना है जैसे-तैसे लॉकडाउन में भरण-पोषण हो रहा है, लेकिन लाखों रुपए के हुए नुकसान की भरपाई करना मुश्किल है। इधर कुंभकार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि लॉकडाउन की अवधि बढऩे से आगे भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। परिवार को पालने की कठिन चुनौती से कुंभकार लगातार संघर्ष कर रहे हैं। मोहारा स्थित करीब 4 परिवार के कुंभकारों को फिलहाल नए आर्डर नहीं मिल रहे हैं।

पूर्व में तैयार किए गए घड़े और अन्य मिट्टी निर्मित सामान के खरीददार नहीं मिलने से लाखों रुपए का घाटा हुआ है। इस घाटे की भरपाई करना कुंभकारों के लिए आसान नहीं है। अगले दो माह में मानसून के दस्तक के साथ उनका कारोबार भी सिमट जाएगा। फिर त्यौहारी सीजन शुरू होने पर ही कमाई की गुंजाईश होगी।

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